<img src="//trc.taboola.com/1148583/log/3/unip?en=page_view" width="0" height="0" style="display:none"> Couples’ Yoga During Pregnancy - MamyPoko India Blog
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पहली तिमाही, दूसरी तिमाही, तीसरी तिमाही

गर्भावस्था के दौरान दम्पतियों का योग

वैकल्पिक टेक्स्ट द्वारा: सुश्री प्रदीप्ता संघवी | जनवरी 20, 2019

योग एक संस्कृत शब्द है जो संस्कृत मूल “युज” से व्युत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है कनेक्ट करना, जोड़ना या संतुलन बनाना। गूढ़ स्तर पर देखें तो यह व्यक्ति के अवचेतन को ईश्वरीय अवचेतन के साथ लाना है।

दम्पति, जैसा कि मैं समझता हूं, दो लोग होते हैं जो शादी-शुदा होते हैं या रोमांटिक तरीके से या लैंगिक तरीके से एक दूसरे से जुड़े होते हैं। दो व्यक्ति के एक होने से एक नए जीवन का निर्माण होता है।

गर्भावस्था के दौरान, साथ मिलकर योग करने से एक प्रगतिशील बंधन का निर्माण हो सकता है, और एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम का निर्माण हो सकता है जिससे साथी उन परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील बनता है जो परिवर्तन भावी माँ में हो रहे होते हैं।

कई बार हम इस अवधि में होने वाले पिता की भावनात्मक स्थिति की अनदेखी कर देते हैं।

योगाभ्यास करने से दोनों साथियों को एक दूसरे की भावना समझने में मदद मिलेगी।

माँ के आराम को देखते हुए, वह अभी किस तिमाही में है और उसकी साधारण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए आसन किए जाते हैं। इससे आसन करते समय साथी को सुरक्षा और सहारा महसूस होता है। देखें कि आपके साथी के स्पर्श से स्वाभावित रूप से आपकी सांस गहरी हो जाती है, जिससे आपको तनावमुक्त होने और शांत होने में मदद मिलती है।

नीचे दिए गए चित्र में दिखाए गए रीढ़ से संबंधित सभी गतिविधि को करना असाना है।

साथी की मदद से डीप स्क्वैट और वाइड हिप ओपनर अभ्यास करने से प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिलती है

साथी के द्वारा पीठ और कंधे की मालिश करने से पीठ के दर्द में आराम मिलता है।

यह प्रसव के समय आपके और आपके साथी के लिए एकसाथ काम करने का एक अवसर है। प्रसव और जन्म के लिए झुकावों और मुद्राओं के बारे में जानें

शवासन में शिथिल होना

श्वसन की विधियों जैसे उज्जयी प्राणायाम (विजय की सांस), नाड़ी शोधन (बारी-बारी से दोनों नथुने से सांस लेना) और भ्रामरी (बी प्राणायाम) से आपको भावनात्मक बदलावों से निपटने और मन को पूरी तरह शांत करने में मदद मिलेगी

बैठी हुई मुद्रा में ध्यान करने से, एक दूसरे की ओर मुंह करके या एक के पीछे एक बैठ करता या अगल-बगल बैठकर, काफी मदद मिलती है। एकसाथ मंत्रोच्चार करने से आपके अंदर और आपके बाहर समरसतापूर्ण अनुनाद का निर्माण होता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संपूर्ण प्रक्रिया को एक मनोरंजक गतिविधि बनाएं और शिशु के साथ संबंध का आनंद लें।

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